श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.73.2

दशम स्कन्ध · अध्याय 73 · अथ त्रिसप्ततितमोऽध्यायः

क्षुत्क्षामाः शुष्कवदनाः संरोधपरिकर्शिताः।

ददृशुस्ते घनश्यामं पीतकौशेयवाससम्॥ २

kṣutkṣāmāḥ śuṣkavadanāḥ saṃrodhaparikarśitāḥ|

dadṛśuste ghanaśyāmaṃ pītakauśeyavāsasam|| 2

अर्थ

वे भूखसे दुर्बल हो रहे थे और उनके मुँह सूख गये थे। जेलमें बंद रहनेके कारण उनके शरीरका एक-एक अंग ढीला पड़ गया था। वहाँसे निकलते ही उन नरपतियोंने देखा कि सामने भगवान् श्रीकृष्ण खड़े हैं। वर्षाकालीन मेघके समान उनका साँवला-सलोना शरीर है और उसपर पीले रंगका रेशमी वस्त्र फहरा रहा है॥ २॥

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