श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.73.26

दशम स्कन्ध · अध्याय 73 · अथ त्रिसप्ततितमोऽध्यायः

भोजयित्वा वरान्‍नेन सुस्नातान् समलंकृतान्।

भोगैश्‍च विविधैर्युक्तांस्ताम्बूलाद्यैर्नृपोचितैः॥ २६

bhojayitvā varānnena susnātān samalaṃkṛtān|

bhogaiśca vividhairyuktāṃstāmbūlādyairnṛpocitaiḥ|| 26

अर्थ

जब वे स्नान करके वस्त्राभूषणसे सुसज्जित हो चुके, तब भगवान्‌ने उन्हें उत्तम-उत्तम पदार्थोंका भोजन करवाया और पान आदि विविध प्रकारके राजोचित भोग दिलवाये॥ २६॥

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