जब वे स्नान करके वस्त्राभूषणसे सुसज्जित हो चुके, तब भगवान्ने उन्हें उत्तम-उत्तम पदार्थोंका भोजन करवाया और पान आदि विविध प्रकारके राजोचित भोग दिलवाये॥ २६॥
भोजयित्वा वरान्नेन सुस्नातान् समलंकृतान्।
भोगैश्च विविधैर्युक्तांस्ताम्बूलाद्यैर्नृपोचितैः॥ २६
जब वे स्नान करके वस्त्राभूषणसे सुसज्जित हो चुके, तब भगवान्ने उन्हें उत्तम-उत्तम पदार्थोंका भोजन करवाया और पान आदि विविध प्रकारके राजोचित भोग दिलवाये॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.73.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 590) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/73/26/