धर्मराज युधिष्ठिरने कहा—सच्चिदानन्दस्वरूप श्रीकृष्ण! त्रिलोकीके स्वामी ब्रह्मा, शंकर आदि और इन्द्रादि लोकपाल—सब आपकी आज्ञा पानेके लिये तरसते रहते हैं और यदि वह मिल जाती है तो बड़ी श्रद्धासे उसको शिरोधार्य करते हैं॥ २॥✎ 1439
ये स्युस्त्रैलोक्यगुरवः सर्वे लोकमहेश्वराः।
वहन्ति दुर्लभं लब्ध्वा शिरसैवानुशासनम्॥ २
धर्मराज युधिष्ठिरने कहा—सच्चिदानन्दस्वरूप श्रीकृष्ण! त्रिलोकीके स्वामी ब्रह्मा, शंकर आदि और इन्द्रादि लोकपाल—सब आपकी आज्ञा पानेके लिये तरसते रहते हैं और यदि वह मिल जाती है तो बड़ी श्रद्धासे उसको शिरोधार्य करते हैं॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.74.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 591) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/74/2/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)