श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.74.25

दशम स्कन्ध · अध्याय 74 · अथ चतुःसप्ततितमोऽध्यायः

इत्युक्त्वा सहदेवोऽभूत् तूष्णीं कृष्णानुभाववित्।

तच्छ्रुत्वा तुष्टुवुः सर्वे साधु साध्विति सत्तमाः॥ २५

ityuktvā sahadevo'bhūt tūṣṇīṃ kṛṣṇānubhāvavit|

tacchrutvā tuṣṭuvuḥ sarve sādhu sādhviti sattamāḥ|| 25

अर्थ

परीक्षित्! सहदेव भगवान्‌की महिमा और उनके प्रभावको जानते थे। इतना कहकर वे चुप हो गये। उस समय धर्मराज युधिष्ठिरकी यज्ञसभामें जितने सत्पुरुष उपस्थित थे, सबने एक स्वरसे ‘बहुत ठीक, बहुत ठीक’ कहकर सहदेवकी बातका समर्थन किया॥ २५॥

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