श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.74.31

दशम स्कन्ध · अध्याय 74 · अथ चतुःसप्ततितमोऽध्यायः

ईशो दुरत्ययः काल इति सत्यवती श्रुतिः।

वृद्धानामपि यद् बुद्धिर्बालवाक्यैर्विभिद्यते॥ ३१

īśo duratyayaḥ kāla iti satyavatī śrutiḥ|

vṛddhānāmapi yad buddhirbālavākyairvibhidyate|| 31

अर्थ

‘सभासदो! श्रुतियोंका यह कहना सर्वथा सत्य है कि काल ही ईश्‍वर है। लाख चेष्टा करनेपर भी वह अपना काम करा ही लेता है—इसका प्रत्यक्ष प्रमाण हमने देख लिया कि यहाँ बच्चों और मूर्खोंकी बातसे बड़े-बड़े वयोवृद्ध और ज्ञानवृद्धोंकी बुद्धि भी चकरा गयी है॥ ३१॥

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