श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.74.33

दशम स्कन्ध · अध्याय 74 · अथ चतुःसप्ततितमोऽध्यायः

तपोविद्याव्रतधरान् ज्ञानविध्वस्तकल्मषान्।

परमर्षीन् ब्रह्मनिष्ठान् लोकपालैश्‍च पूजितान्॥ ३३

tapovidyāvratadharān jñānavidhvastakalmaṣān|

paramarṣīn brahmaniṣṭhān lokapālaiśca pūjitān|| 33

अर्थ

यहाँ बड़े-बड़े तपस्वी, विद्वान्, व्रतधारी, ज्ञानके द्वारा अपने समस्त पाप-तापोंको शान्त करनेवाले, परम ज्ञानी परमर्षि, ब्रह्मनिष्ठ आदि उपस्थित हैं—जिनकी पूजा बड़े-बड़े लोकपाल भी करते हैं॥ ३३॥

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