श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.74.8

दशम स्कन्ध · अध्याय 74 · अथ चतुःसप्ततितमोऽध्यायः

विश्‍वामित्रो वामदेवः सुमतिर्जैमिनिः क्रतुः।

पैलः पराशरो गर्गो वैशम्पायन एव च॥ ८

viśvāmitro vāmadevaḥ sumatirjaiminiḥ kratuḥ|

pailaḥ parāśaro gargo vaiśampāyana eva ca|| 8

अर्थ

उनके नाम ये हैं—श्रीकृष्णद्वैपायन व्यासदेव, भरद्वाज, सुमन्तु, गौतम, असित, वसिष्ठ, च्यवन, कण्व, मैत्रेय, कवष, त्रित, विश्‍वामित्र, वामदेव, सुमति, जैमिनि, क्रतु, पैल, पराशर, गर्ग, वैशम्पायन, अथर्वा, कश्यप, धौम्य, परशुराम, शुक्राचार्य, आसुरि, वीतिहोत्र, मधुच्छन्दा, वीरसेन और अकृतव्रण॥ ७—९॥

यह अर्थ श्लोक 7–9 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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