॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.75.12
यदुसृंजयकाम्बोजकुरुकेकयकोसलाः ।
कम्पयन्तो भुवं सैन्यैर्यजमानपुरःसराः॥ १२
yadusṛṃjayakāmbojakurukekayakosalāḥ |
kampayanto bhuvaṃ sainyairyajamānapuraḥsarāḥ|| 12
अर्थ
सोनेके हार पहने हुए यदु, सृंजय, कम्बोज, कुरु, केकय और कोसल देशके नरपति रंग-बिरंगी ध्वजा-पताकाओंसे युक्त और खूब सजे-धजे गजराजों, रथों, घोड़ों तथा सुसज्जित वीर सैनिकोंके साथ महाराज युधिष्ठिरको आगे करके पृथ्वीको कँपाते हुए चल रहे थे॥ ११-१२॥