श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.75.29

दशम स्कन्ध · अध्याय 75 · अथ पञ्चसप्ततितमोऽध्यायः

भगवानपि तत्रांग न्यवात्सीत्तत्प्रियंकरः।

प्रस्थाप्य यदुवीरांश्‍च साम्बादींश्‍च कुशस्थलीम्॥ २९

bhagavānapi tatrāṃga nyavātsīttatpriyaṃkaraḥ|

prasthāpya yaduvīrāṃśca sāmbādīṃśca kuśasthalīm|| 29

अर्थ

परीक्षित्! भगवान् श्रीकृष्णने यदुवंशी वीर साम्ब आदिको द्वारकापुरी भेज दिया और स्वयं राजा युधिष्ठिरकी अभिलाषा पूर्ण करनेके लिये, उन्हें आनन्द देनेके लिये वहीं रह गये॥ २९॥

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