परीक्षित्! भगवान् श्रीकृष्णने यदुवंशी वीर साम्ब आदिको द्वारकापुरी भेज दिया और स्वयं राजा युधिष्ठिरकी अभिलाषा पूर्ण करनेके लिये, उन्हें आनन्द देनेके लिये वहीं रह गये॥ २९॥
भगवानपि तत्रांग न्यवात्सीत्तत्प्रियंकरः।
प्रस्थाप्य यदुवीरांश्च साम्बादींश्च कुशस्थलीम्॥ २९
परीक्षित्! भगवान् श्रीकृष्णने यदुवंशी वीर साम्ब आदिको द्वारकापुरी भेज दिया और स्वयं राजा युधिष्ठिरकी अभिलाषा पूर्ण करनेके लिये, उन्हें आनन्द देनेके लिये वहीं रह गये॥ २९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.75.29 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 600) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/75/29/