एक दिनकी बात है, भगवान्के परमप्रेमी महाराज युधिष्ठिरके अन्तःपुरकी सौन्दर्य-सम्पत्ति और राजसूय यज्ञद्वारा प्राप्त महत्त्वको देखकर दुर्योधनका मन डाहसे जलने लगा॥ ३१॥
एकदान्तःपुरे तस्य वीक्ष्य दुर्योधनः श्रियम्।
अतप्यद् राजसूयस्य महित्वं चाच्युतात्मनः॥ ३१
एक दिनकी बात है, भगवान्के परमप्रेमी महाराज युधिष्ठिरके अन्तःपुरकी सौन्दर्य-सम्पत्ति और राजसूय यज्ञद्वारा प्राप्त महत्त्वको देखकर दुर्योधनका मन डाहसे जलने लगा॥ ३१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.75.31 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 601) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/75/31/