श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.76.17

दशम स्कन्ध · अध्याय 76 · अथ षट्सप्ततितमोऽध्यायः

ताश्‍च सौभपतेर्माया दिव्यास्त्रै रुक्मिणीसुतः।

क्षणेन नाशयामास नैशं तम इवोष्णगुः॥ १७

tāśca saubhapatermāyā divyāstrai rukmiṇīsutaḥ|

kṣaṇena nāśayāmāsa naiśaṃ tama ivoṣṇaguḥ|| 17

अर्थ

प्रद्युम्‍नजीने अपने दिव्य अस्त्रोंसे क्षणभरमें ही सौभपति शाल्वकी सारी माया काट डाली; ठीक वैसे ही जैसे सूर्य अपनी प्रखर किरणोंसे रात्रिका अन्धकार मिटा देते हैं॥ १७॥

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