श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.76.27

दशम स्कन्ध · अध्याय 76 · अथ षट्सप्ततितमोऽध्यायः

प्रद्युम्‍नं गदया शीर्णवक्षःस्थलमरिन्दमम्।

अपोवाह रणात् सूतो धर्मविद् दारुकात्मजः॥ २७

pradyumnaṃ gadayā śīrṇavakṣaḥsthalamarindamam|

apovāha raṇāt sūto dharmavid dārukātmajaḥ|| 27

अर्थ

परीक्षित्! गदाकी चोटसे शत्रुदमन प्रद्युम्‍नजीका वक्षःस्थल फट-सा गया। दारुकका पुत्र उनका रथ हाँक रहा था। वह सारथिधर्मके अनुसार उन्हें रणभूमिसे हटा ले गया॥ २७॥

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