॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.76.6
देवासुरमनुष्याणां गन्धर्वोरगरक्षसाम्।
अभेद्यं कामगं वव्रे स यानं वृष्णिभीषणम्॥ ६
devāsuramanuṣyāṇāṃ gandharvoragarakṣasām|
abhedyaṃ kāmagaṃ vavre sa yānaṃ vṛṣṇibhīṣaṇam|| 6
अर्थ
उस समय शाल्वने यह वर माँगा कि ‘मुझे आप एक ऐसा विमान दीजिये जो देवता, असुर, मनुष्य, गन्धर्व, नाग और राक्षसोंसे तोड़ा न जा सके; जहाँ इच्छा हो, वहीं चला जाय और यदुवंशियोंके लिये अत्यन्त भयंकर हो’॥ ६॥