tatāḍa jatrau saṃrabdhaḥ sa cakampe vamannasṛk|| 20
अर्थ
इस प्रकार कहकर भगवान् श्रीकृष्णने क्रोधित हो अपनी अत्यन्त वेगवती और भयंकर गदासे शाल्वके जत्रुस्थान (हँसली) पर प्रहार किया। इससे वह खून उगलता हुआ काँपने लगा॥ २०॥
इत्युक्त्वा भगवाञ्छाल्वं गदया भीमवेगया।
तताड जत्रौ संरब्धः स चकम्पे वमन्नसृक्॥ २०
इस प्रकार कहकर भगवान् श्रीकृष्णने क्रोधित हो अपनी अत्यन्त वेगवती और भयंकर गदासे शाल्वके जत्रुस्थान (हँसली) पर प्रहार किया। इससे वह खून उगलता हुआ काँपने लगा॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.77.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 608) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/77/20/