यह अप्रिय समाचार सुनकर भगवान् श्रीकृष्ण मनुष्य-से बन गये। उनके मुँहपर कुछ उदासी छा गयी। वे साधारण पुरुषके समान अत्यन्त करुणा और स्नेहसे कहने लगे—॥ २३॥
निशम्य विप्रियं कृष्णो मानुषीं प्रकृतिं गतः।
विमनस्को घृणी स्नेहाद् बभाषे प्राकृतो यथा॥ २३
यह अप्रिय समाचार सुनकर भगवान् श्रीकृष्ण मनुष्य-से बन गये। उनके मुँहपर कुछ उदासी छा गयी। वे साधारण पुरुषके समान अत्यन्त करुणा और स्नेहसे कहने लगे—॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.77.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 608) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/77/23/