भगवान् श्रीकृष्ण इस प्रकार कह ही रहे थे कि शाल्व वसुदेवजीके समान एक मायारचित मनुष्य लेकर वहाँ आ पहुँचा और श्रीकृष्णसे कहने लगा—॥ २५॥
इति ब्रुवाणे गोविन्दे सौभराट् प्रत्युपस्थितः।
वसुदेवमिवानीय कृष्णं चेदमुवाच सः॥ २५
भगवान् श्रीकृष्ण इस प्रकार कह ही रहे थे कि शाल्व वसुदेवजीके समान एक मायारचित मनुष्य लेकर वहाँ आ पहुँचा और श्रीकृष्णसे कहने लगा—॥ २५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.77.25 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 608) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/77/25/