श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.77.3

दशम स्कन्ध · अध्याय 77 · अथ सप्तसप्ततितमोऽध्यायः

चतुर्भिश्‍चतुरो वाहान् सूतमेकेन चाहनत्।

द्वाभ्यां धनुश्‍च केतुं च शरेणान्येन वै शिरः॥ ३

caturbhiścaturo vāhān sūtamekena cāhanat|

dvābhyāṃ dhanuśca ketuṃ ca śareṇānyena vai śiraḥ|| 3

अर्थ

चार बाणोंसे उसके चार घोड़े और एक-एक बाणसे सारथी, धनुष, ध्वजा और उसका सिर काट डाला॥ ३॥

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