श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.78.12

दशम स्कन्ध · अध्याय 78 · अथाष्टसप्ततितमोऽध्यायः

तस्य चापततः कृष्णश्‍चक्रेण क्षुरनेमिना।

शिरो जहार राजेन्द्र सकिरीटं सकुण्डलम्॥ १२

tasya cāpatataḥ kṛṣṇaścakreṇa kṣuraneminā|

śiro jahāra rājendra sakirīṭaṃ sakuṇḍalam|| 12

अर्थ

राजेन्द्र! जब भगवान् श्रीकृष्णने देखा कि अब वह प्रहार करना ही चाहता है, तब उन्होंने अपने छुरेके समान तीखी धारवाले चक्रसे किरीट और कुण्डलके साथ उसका सिर धड़से अलग कर दिया॥ १२॥

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