राजेन्द्र! जब भगवान् श्रीकृष्णने देखा कि अब वह प्रहार करना ही चाहता है, तब उन्होंने अपने छुरेके समान तीखी धारवाले चक्रसे किरीट और कुण्डलके साथ उसका सिर धड़से अलग कर दिया॥ १२॥
तस्य चापततः कृष्णश्चक्रेण क्षुरनेमिना।
शिरो जहार राजेन्द्र सकिरीटं सकुण्डलम्॥ १२
राजेन्द्र! जब भगवान् श्रीकृष्णने देखा कि अब वह प्रहार करना ही चाहता है, तब उन्होंने अपने छुरेके समान तीखी धारवाले चक्रसे किरीट और कुण्डलके साथ उसका सिर धड़से अलग कर दिया॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.78.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 612) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/78/12/