श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.78.16

दशम स्कन्ध · अध्याय 78 · अथाष्टसप्ततितमोऽध्यायः

एवं योगेश्‍वरः कृष्णो भगवान् जगदीश्‍वरः।

ईयते पशुदृष्टीनां निर्जितो जयतीति सः॥ १६

evaṃ yogeśvaraḥ kṛṣṇo bhagavān jagadīśvaraḥ|

īyate paśudṛṣṭīnāṃ nirjito jayatīti saḥ|| 16

अर्थ

योगेश्‍वर एवं जगदीश्‍वर भगवान् श्रीकृष्ण इसी प्रकार अनेकों खेल खेलते रहते हैं। जो पशुओंके समान अविवेकी हैं, वे उन्हें कभी हारते भी देखते हैं। परन्तु वास्तवमें तो वे सदा-सर्वदा विजयी ही हैं॥ १६॥

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