इसके बाद वे फाल्गुन तीर्थ—अनन्तशयन क्षेत्रमें गये और वहाँके सर्वश्रेष्ठ पंचाप्सरस तीर्थमें स्नान किया। उस तीर्थमें सर्वदा विष्णुभगवान्का सान्निध्य रहता है। वहाँ बलरामजीने दस हजार गौएँ दान कीं॥ १८॥
ततः फाल्गुनमासाद्य पंचाप्सरसमुत्तमम्।
विष्णुः सन्निहितो यत्र स्नात्वास्पर्शद् गवायुतम्॥ १८
इसके बाद वे फाल्गुन तीर्थ—अनन्तशयन क्षेत्रमें गये और वहाँके सर्वश्रेष्ठ पंचाप्सरस तीर्थमें स्नान किया। उस तीर्थमें सर्वदा विष्णुभगवान्का सान्निध्य रहता है। वहाँ बलरामजीने दस हजार गौएँ दान कीं॥ १८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.79.18 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 617) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/79/18/