॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.79.20
आर्यां द्वैपायनीं दृष्ट्वा शूर्पारकमगाद् बलः।
तापीं पयोष्णीं निर्विन्ध्यामुपस्पृश्याथ दण्डकम्॥ २०
āryāṃ dvaipāyanīṃ dṛṣṭvā śūrpārakamagād balaḥ|
tāpīṃ payoṣṇīṃ nirvindhyāmupaspṛśyātha daṇḍakam|| 20
अर्थ
वहाँसे जलसे घिरे द्वीपमें निवास करनेवाली आर्यादेवीका दर्शन करने गये और फिर उस द्वीपसे चलकर शूर्पारक-क्षेत्रकी यात्रा की, इसके बाद तापी, पयोष्णी और निर्विन्ध्या नदियोंमें स्नान करके वे दण्डकारण्यमें आये॥ २०॥