इसलिये तुमलोगों-जैसे समान बलशालियोंमें किसी एककी जय या पराजय नहीं होती दीखती। अतः तुमलोग व्यर्थका युद्ध मत करो, अब इसे बंद कर दो’॥ २७॥
तस्मादेकतरस्येह युवयोः समवीर्ययोः।
न लक्ष्यते जयोऽन्यो वा विरमत्वफलो रणः॥ २७
इसलिये तुमलोगों-जैसे समान बलशालियोंमें किसी एककी जय या पराजय नहीं होती दीखती। अतः तुमलोग व्यर्थका युद्ध मत करो, अब इसे बंद कर दो’॥ २७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.79.27 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 618) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/79/27/