सर्वसमर्थ भगवान् बलरामने उन ऋषियोंको विशुद्ध तत्त्वज्ञानका उपदेश किया, जिससे वे लोग इस सम्पूर्ण विश्वको अपने-आपमें और अपने-आपको सारे विश्वमें अनुभव करने लगे॥ ३१॥
तेभ्यो विशुद्धविज्ञानं भगवान् व्यतरद् विभुः।
येनैवात्मन्यदो विश्वमात्मानं विश्वगं विदुः॥ ३१
सर्वसमर्थ भगवान् बलरामने उन ऋषियोंको विशुद्ध तत्त्वज्ञानका उपदेश किया, जिससे वे लोग इस सम्पूर्ण विश्वको अपने-आपमें और अपने-आपको सारे विश्वमें अनुभव करने लगे॥ ३१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.79.31 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 618) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/79/31/