भगवान् श्रीकृष्णने कहा—धर्मके मर्मज्ञ ब्राह्मणदेव! गुरुदक्षिणा देकर जब आप गुरुकुलसे लौट आये, तब आपने अपने अनुरूप स्त्रीसे विवाह किया या नहीं?॥ २८॥
अपि ब्रह्मन् गुरुकुलाद् भवता लब्धदक्षिणात्।
समावृत्तेन धर्मज्ञ भार्योढा सदृशी न वा॥ २८
भगवान् श्रीकृष्णने कहा—धर्मके मर्मज्ञ ब्राह्मणदेव! गुरुदक्षिणा देकर जब आप गुरुकुलसे लौट आये, तब आपने अपने अनुरूप स्त्रीसे विवाह किया या नहीं?॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.80.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 622) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/80/28/