श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.81.16

दशम स्कन्ध · अध्याय 81 · अथैकाशीतितमोऽध्यायः

क्वाहं दरिद्रः पापीयान् क्व कृष्णः श्रीनिकेतनः।

ब्रह्मबन्धुरिति स्माहं बाहुभ्यां परिरम्भितः॥ १६

kvāhaṃ daridraḥ pāpīyān kva kṛṣṇaḥ śrīniketanaḥ|

brahmabandhuriti smāhaṃ bāhubhyāṃ parirambhitaḥ|| 16

अर्थ

कहाँ तो मैं अत्यन्त पापी और दरिद्र, और कहाँ लक्ष्मीके एकमात्र आश्रय भगवान् श्रीकृष्ण! परन्तु उन्होंने ‘यह ब्राह्मण है’—ऐसा समझकर मुझे अपनी भुजाओंमें भरकर हृदयसे लगा लिया॥ १६॥

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