श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.81.38

दशम स्कन्ध · अध्याय 81 · अथैकाशीतितमोऽध्यायः

इत्थं व्यवसितो बुद्ध्या भक्तोऽतीव जनार्दने।

विषयाञ्जायया त्यक्ष्यन् बुभुजे नातिलम्पटः॥ ३८

itthaṃ vyavasito buddhyā bhakto'tīva janārdane|

viṣayāñjāyayā tyakṣyan bubhuje nātilampaṭaḥ|| 38

अर्थ

परीक्षित्! अपनी बुद्धिसे इस प्रकार निश्‍चय करके वे ब्राह्मणदेवता त्यागपूर्वक अनासक्तभावसे अपनी पत्‍नीके साथ भगवत्प्रसादस्वरूप विषयोंको ग्रहण करने लगे और दिनोंदिन उनकी प्रेम-भक्ति बढ़ने लगी॥ ३८॥

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