भगवान् श्रीकृष्णने ऐसा विचार करके उनके वस्त्रमेंसे चिथड़ेकी एक पोटलीमें बँधा हुआ चिउड़ा ‘यह क्या है’—ऐसा कहकर स्वयं ही छीन लिया॥ ८॥
इत्थं विचिन्त्य वसनाच्चीरबद्धान्द्विजन्मनः।
स्वयं जहार किमिदमिति पृथुकतण्डुलान्॥ ८
भगवान् श्रीकृष्णने ऐसा विचार करके उनके वस्त्रमेंसे चिथड़ेकी एक पोटलीमें बँधा हुआ चिउड़ा ‘यह क्या है’—ऐसा कहकर स्वयं ही छीन लिया॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.81.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 625) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/81/8/