श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.83.1

दशम स्कन्ध · अध्याय 83 · अथ त्र्यशीतितमोऽध्यायः

अथ त्र्यशीतितमोऽध्यायः✎ 2131

भगवान्‌की पटरानियोंके साथ द्रौपदीकी बातचीत

श्रीशुक उवाच

तथानुगृह्य भगवान् गोपीनां स गुरुर्गतिः।

युधिष्ठिरमथापृच्छत् सर्वांश्‍च सुहृदोऽव्ययम्॥ १

tathānugṛhya bhagavān gopīnāṃ sa gururgatiḥ|

yudhiṣṭhiramathāpṛcchat sarvāṃśca suhṛdo'vyayam|| 1

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! भगवान् श्रीकृष्ण ही गोपियोंको शिक्षा देनेवाले हैं और वही उस शिक्षाके द्वारा प्राप्त होनेवाली वस्तु हैं। इसके पहले, जैसा कि वर्णन किया गया है, भगवान् श्रीकृष्णने उनपर महान् अनुग्रह किया। अब उन्होंने धर्मराज युधिष्ठिर तथा अन्य समस्त सम्बन्धियोंसे कुशल-मंगल पूछा॥ १॥✎ 1440

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1440 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): ह्रस → ह्रास

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