श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.83.38

दशम स्कन्ध · अध्याय 83 · अथ त्र्यशीतितमोऽध्यायः

दासीभिः सर्वसम्पद्भिर्भटेभरथवाजिभिः।

आयुधानि महार्हाणि ददौ पूर्णस्य भक्तितः॥ ३८

dāsībhiḥ sarvasampadbhirbhaṭebharathavājibhiḥ|

āyudhāni mahārhāṇi dadau pūrṇasya bhaktitaḥ|| 38

अर्थ

भगवान् परिपूर्ण हैं—तथापि मेरे पिताजीने प्रेमवश उन्हें बहुत-सी दासियाँ, सब प्रकारकी सम्पत्तियाँ, सैनिक, हाथी, रथ, घोड़े एवं बहुत-से बहुमूल्य अस्त्र-शस्त्र समर्पित किये॥ ३८॥

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