श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.84.20

दशम स्कन्ध · अध्याय 84 · अथ चतुरशीतितमोऽध्यायः

तस्माद् ब्रह्मकुलं ब्रह्मन् शास्त्रयोनेस्त्वमात्मनः।

सभाजयसि स१द्धाम तद् ब्रह्मण्याग्रणीर्भवान्॥ २०

tasmād brahmakulaṃ brahman śāstrayonestvamātmanaḥ|

sabhājayasi saddhāma tad brahmaṇyāgraṇīrbhavān|| 20

अर्थ

परमात्मन्! ब्राह्मण ही वेदोंके आधारभूत आपके स्वरूपकी उपलब्धिके स्थान हैं; इसीसे आप ब्राह्मणोंका सम्मान करते हैं और इसीसे आप ब्राह्मणभक्तोंमें अग्रगण्य भी हैं॥ २०॥

टिप्पणियाँ

  1. १

    यः सर्वांस्तस्माद‍्ब्रह्माग्र०।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 646)

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