इसके बाद उन्होंने उचित समयपर ऋत्विजोंको वस्त्रालंकारोंसे सुसज्जित किया और शास्त्रके अनुसार बहुत-सी दक्षिणा तथा प्रचुर धनके साथ अलंकृत गौएँ, पृथ्वी और सुन्दरी कन्याएँ दीं॥ ५२॥✎ 1717
अथर्त्विग्भ्योऽददात् काले यथाम्नातं स दक्षिणाः।
स्वलंकृतेभ्योऽलंकृत्य गोभूकन्या महाधनाः॥ ५२
इसके बाद उन्होंने उचित समयपर ऋत्विजोंको वस्त्रालंकारोंसे सुसज्जित किया और शास्त्रके अनुसार बहुत-सी दक्षिणा तथा प्रचुर धनके साथ अलंकृत गौएँ, पृथ्वी और सुन्दरी कन्याएँ दीं॥ ५२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.84.52 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 649) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/84/52/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)