श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.85.3

दशम स्कन्ध · अध्याय 85 · अथ पञ्चाशीतितमोऽध्यायः

कृष्ण कृष्ण महायोगिन् संकर्षण सनातन।

जाने वामस्य यत् साक्षात् प्रधानपुरुषौ परौ॥ ३

kṛṣṇa kṛṣṇa mahāyogin saṃkarṣaṇa sanātana|

jāne vāmasya yat sākṣāt pradhānapuruṣau parau|| 3

अर्थ

‘सच्चिदानन्दस्वरूप श्रीकृष्ण! महायोगीश्‍वर संकर्षण! तुम दोनों सनातन हो। मैं जानता हूँ कि तुम दोनों सारे जगत‍्के साक्षात् कारणस्वरूप प्रधान और पुरुषके भी नियामक परमेश्‍वर हो॥ ३॥

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