परीक्षित्! इतना कहकर भगवान् श्रीकृष्ण चुप हो गये। दैत्यराज बलिने उनकी पूजा की; इसके बाद श्रीकृष्ण और बलरामजी बालकोंको लेकर फिर द्वारका लौट आये तथा माता देवकीको उनके पुत्र सौंप दिये॥ ५२॥✎ 1719
इत्युक्त्वा तान् समादाय इन्द्रसेनेन पूजितौ।
पुनर्द्वारवतीमेत्य मातुः पुत्रानयच्छताम्॥ ५२
परीक्षित्! इतना कहकर भगवान् श्रीकृष्ण चुप हो गये। दैत्यराज बलिने उनकी पूजा की; इसके बाद श्रीकृष्ण और बलरामजी बालकोंको लेकर फिर द्वारका लौट आये तथा माता देवकीको उनके पुत्र सौंप दिये॥ ५२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.85.52 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 658) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/85/52/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)