परीक्षित्! भगवान् श्रीकृष्ण स्वयं परमात्मा हैं, उनकी शक्ति अनन्त है। उनके ऐसे-ऐसे अद्भुत चरित्र इतने हैं कि किसी प्रकार उनका पार नहीं पाया जा सकता॥ ५८॥✎ 1719
एवंविधान्यद्भुतानि कृष्णस्य परमात्मनः।
वीर्याण्यनन्तवीर्यस्य सन्त्यनन्तानि भारत॥ ५८
परीक्षित्! भगवान् श्रीकृष्ण स्वयं परमात्मा हैं, उनकी शक्ति अनन्त है। उनके ऐसे-ऐसे अद्भुत चरित्र इतने हैं कि किसी प्रकार उनका पार नहीं पाया जा सकता॥ ५८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.85.58 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 659) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/85/58/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)