श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.87.12

दशम स्कन्ध · अध्याय 87 · अथ सप्ताशीतितमोऽध्यायः

सनन्दन उवाच

स्वसृष्टमिदमापीय शयानं सह शक्तिभिः।

तदन्ते बोधयांचक्रुस्तल्लिङ्गैः श्रुतयः परम्॥ १२

svasṛṣṭamidamāpīya śayānaṃ saha śaktibhiḥ|

tadante bodhayāṃcakrustalliṅgaiḥ śrutayaḥ param|| 12

अर्थ

सनन्दनजीने कहा—जिस प्रकार प्रातःकाल होनेपर सोते हुए सम्राट्को जगानेके लिये अनुजीवी वंदीजन उसके पास आते हैं और सम्राट्के पराक्रम तथा सुयशका गान करके उसे जगाते हैं, वैसे ही जब परमात्मा अपने बनाये हुए सम्पूर्ण जगत‍्को अपनेमें लीन करके अपनी शक्तियोंके सहित सोये रहते हैं; तब प्रलयके अन्तमें श्रुतियाँ उनका प्रतिपादन करनेवाले वचनोंसे उन्हें इस प्रकार जगाती हैं॥ १२-१३॥

यह अर्थ श्लोक 12–13 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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