परीक्षित्! इसी प्रकार अपने दूसरे और तीसरे बालकके भी पैदा होते ही मर जानेपर वह ब्राह्मण लड़केकी लाश राजमहलके दरवाजेपर डाल गया और वही बात कह गया॥ २६॥✎ 897
एवं द्वितीयं विप्रर्षिस्तृतीयं त्वेवमेव च।
विसृज्य स नृपद्वारि तां गाथां समगायत॥ २६
परीक्षित्! इसी प्रकार अपने दूसरे और तीसरे बालकके भी पैदा होते ही मर जानेपर वह ब्राह्मण लड़केकी लाश राजमहलके दरवाजेपर डाल गया और वही बात कह गया॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.89.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 696) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/89/26/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)