श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.89.34

दशम स्कन्ध · अध्याय 89 · अथैकोननवतितमोऽध्यायः

मावमंस्था मम ब्रह्मन् वीर्यं त्र्यम्बकतोषणम्।✎ 2142

मृत्युं विजित्य प्रधने आनेष्ये ते प्रजां प्रभो॥ ३४

māvamaṃsthā mama brahman vīryaṃ tryambakatoṣaṇam|

mṛtyuṃ vijitya pradhane āneṣye te prajāṃ prabho|| 34

अर्थ

ब्राह्मणदेवता! आप मेरे बल-पौरुषका तिरस्कार मत कीजिये। आप जानते नहीं, मैं अपने पराक्रमसे भगवान् शंकरको सन्तुष्ट कर चुका हूँ। भगवन्! मैं आपसे अधिक क्या कहूँ, मैं युद्धमें साक्षात् मृत्युको भी जीतकर आपकी सन्तान ला दूँगा॥ ३४॥

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #2142 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): र्यं त्रॺम्बक → र्यं त्र्यम्बक

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