॥ श्रीहरिः ॥
इति संभाष्य भगवानर्जुनेन सहेश्वरः।
दिव्यं स्वरथमास्थाय प्रतीचीं दिशमाविशत्॥ ४७
iti saṃbhāṣya bhagavānarjunena saheśvaraḥ|
divyaṃ svarathamāsthāya pratīcīṃ diśamāviśat|| 47
अर्थ
सर्वशक्तिमान् भगवान् श्रीकृष्ण इस प्रकार समझा-बुझाकर अर्जुनके साथ अपने दिव्य रथपर सवार हुए और पश्चिम दिशाको प्रस्थान किया॥ ४७॥
इति संभाष्य भगवानर्जुनेन सहेश्वरः।
दिव्यं स्वरथमास्थाय प्रतीचीं दिशमाविशत्॥ ४७
सर्वशक्तिमान् भगवान् श्रीकृष्ण इस प्रकार समझा-बुझाकर अर्जुनके साथ अपने दिव्य रथपर सवार हुए और पश्चिम दिशाको प्रस्थान किया॥ ४७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.89.47 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 698) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/89/47/