श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.89.47

दशम स्कन्ध · अध्याय 89 · अथैकोननवतितमोऽध्यायः

इति संभाष्य भगवानर्जुनेन सहेश्‍वरः।

दिव्यं स्वरथमास्थाय प्रतीचीं दिशमाविशत्॥ ४७

iti saṃbhāṣya bhagavānarjunena saheśvaraḥ|

divyaṃ svarathamāsthāya pratīcīṃ diśamāviśat|| 47

अर्थ

सर्वशक्तिमान् भगवान् श्रीकृष्ण इस प्रकार समझा-बुझाकर अर्जुनके साथ अपने दिव्य रथपर सवार हुए और पश्‍चिम दिशाको प्रस्थान किया॥ ४७॥

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