श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.89.50

दशम स्कन्ध · अध्याय 89 · अथैकोननवतितमोऽध्यायः

तान् दृष्ट्वा भगवान् कृष्णो महायोगेश्‍वरेश्‍वरः।

सहस्रादित्यसंकाशं स्वचक्रं प्राहिणोत् पुरः॥ ५०

tān dṛṣṭvā bhagavān kṛṣṇo mahāyogeśvareśvaraḥ|

sahasrādityasaṃkāśaṃ svacakraṃ prāhiṇot puraḥ|| 50

अर्थ

योगेश्‍वरोंके भी परमेश्‍वर भगवान् श्रीकृष्णने घोड़ोंकी यह दशा देखकर अपने सहस्र-सहस्र सूर्योंके समान तेजस्वी चक्रको आगे चलनेकी आज्ञा दी॥ ५०॥

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