श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.1.25

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

अनिष्टकर्मा हालेयस्तलकस्तस्य चात्मजः।

पुरीषभीरुस्तत्पुत्रस्ततो राजा सुनन्दनः॥ २५

aniṣṭakarmā hāleyastalakastasya cātmajaḥ|

purīṣabhīrustatputrastato rājā sunandanaḥ|| 25

अर्थ

पौर्णमासका लम्बोदर और लम्बोदरका पुत्र चिबिलक होगा। चिबिलकका मेघस्वाति, मेघस्वातिका अटमान, अटमानका अनिष्टकर्मा, अनिष्टकर्माका हालेय, हालेयका तलक, तलकका पुरीषभीरु और पुरीषभीरुका पुत्र होगा राजा सुनन्दन॥ २४-२५॥✎ 1780

यह अर्थ श्लोक 24–25 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1780 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: अनिष्ट-कर्मा, → अनिष्टकर्मा,

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