श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.1.34

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

तेषां त्रयोदश सुता भवितारश्‍च बाह्लिकाः।

पुष्पमित्रोऽथ राजन्यो दुर्मित्रोऽस्य तथैव च॥ ३४

teṣāṃ trayodaśa sutā bhavitāraśca bāhlikāḥ|

puṣpamitro'tha rājanyo durmitro'sya tathaiva ca|| 34

अर्थ

इनके तेरह पुत्र होंगे और वे सब-के-सब बाह्लिक कहलायेंगे। उनके पश्‍चात् पुष्पमित्र नामक क्षत्रिय और उसके पुत्र दुर्मित्रका राज्य होगा॥ ३४॥

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