श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.1.43

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

तन्‍नाथास्ते जनपदास्तच्छीलाचारवादिनः।

अन्योन्यतो राजभिश्‍च क्षयं यास्यन्ति पीडिताः॥ ४३

tannāthāste janapadāstacchīlācāravādinaḥ|

anyonyato rājabhiśca kṣayaṃ yāsyanti pīḍitāḥ|| 43

अर्थ

जब ऐसे लोगोंका शासन होगा, तो देशकी प्रजामें भी वैसे ही स्वभाव, आचरण और भाषणकी वृद्धि हो जायगी। राजालोग तो उनका शोषण करेंगे ही, वे आपसमें भी एक-दूसरेको उत्पीड़ित करेंगे और अन्ततः सब-के-सब नष्ट हो जायँगे॥ ४३॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां द्वादशस्कन्धे प्रथमोऽध्यायः॥ १॥

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