श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.10.36

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

कामो महर्षे सर्वोऽयं भक्तिमांस्त्वमधोक्षजे।

आकल्पान्ताद् यशः पुण्यमजरामरता तथा॥ ३६

kāmo maharṣe sarvo'yaṃ bhaktimāṃstvamadhokṣaje|

ākalpāntād yaśaḥ puṇyamajarāmaratā tathā|| 36

अर्थ

महर्षे! तुम्हारी सारी कामनाएँ पूर्ण हों। इन्द्रियातीत परमात्मामें तुम्हारी अनन्य भक्ति सदा-सर्वदा बनी रहे। कल्पपर्यन्त तुम्हारा पवित्र यश फैले और तुम अजर एवं अमर हो जाओ॥ ३६॥

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