प्रिये! यद्यपि इन्हें हमारी कोई आवश्यकता नहीं है, फिर भी मैं इनके साथ बातचीत करूँगा; क्योंकि ये महात्मा पुरुष हैं। जीवमात्रके लिये सबसे बड़े लाभकी बात यही है कि संत पुरुषोंका समागम प्राप्त हो॥ ७॥
अथापि संवदिष्यामो भवान्येतेन साधुना।
अयं हि परमो लाभो नृणां साधुसमागमः॥ ७
प्रिये! यद्यपि इन्हें हमारी कोई आवश्यकता नहीं है, फिर भी मैं इनके साथ बातचीत करूँगा; क्योंकि ये महात्मा पुरुष हैं। जीवमात्रके लिये सबसे बड़े लाभकी बात यही है कि संत पुरुषोंका समागम प्राप्त हो॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.10.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 959) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/12/10/7/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1245 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): नॄणां → नृणां