॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 12.11.35
मित्रोऽत्रिः पौरुषेयोऽथ तक्षको मेनका हहाः।
रथस्वन इति ह्येते शुक्रमासं नयन्त्यमी॥ ३५
mitro'triḥ pauruṣeyo'tha takṣako menakā hahāḥ|
rathasvana iti hyete śukramāsaṃ nayantyamī|| 35
अर्थ
मित्र सूर्य, अत्रि ऋषि, पौरुषेय राक्षस, तक्षक सर्प, मेनका अप्सरा, हाहा गन्धर्व और रथस्वन यक्ष—ये ज्येष्ठ मासके कार्यनिर्वाहक हैं॥ ३५॥