श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.11.40

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

क्रतुर्वर्चा भरद्वाजः पर्जन्यः सेनजित्तथा।

विश्‍व ऐरावतश्‍चैव तपस्याख्यं नयन्त्यमी॥ ४०

kraturvarcā bharadvājaḥ parjanyaḥ senajittathā|

viśva airāvataścaiva tapasyākhyaṃ nayantyamī|| 40

अर्थ

फाल्गुन मासका कार्यकाल पर्जन्य नामक सूर्यका है। उनके साथ क्रतु यक्ष, वर्चा राक्षस, भरद्वाज ऋषि, सेनजित् अप्सरा, विश्‍व गन्धर्व और ऐरावत सर्प रहते हैं॥ ४०॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें