॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 12.12.26
दौष्यन्तेर्भरतस्यापि शन्तनोस्तत्सुतस्य च।
ययातेर्ज्येष्ठपुत्रस्य यदोर्वंशोऽनुकीर्तितः॥ २६
dauṣyanterbharatasyāpi śantanostatsutasya ca|
yayāterjyeṣṭhaputrasya yadorvaṃśo'nukīrtitaḥ|| 26
अर्थ
भृगुवंशशिरोमणि परशुरामजीका क्षत्रियसंहार, चन्द्रवंशी नरपति पुरूरवा, ययाति, नहुष, दुष्यन्त-नन्दन भरत, शन्तनु और उनके पुत्र भीष्म आदिकी संक्षिप्त कथाएँ भी नवम स्कन्धमें ही हैं। सबके अन्तमें ययातिके बड़े लड़के यदुका वंशविस्तार कहा गया है॥ २५-२६॥