श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.12.28

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

तस्य कर्माण्यपाराणि कीर्तितान्यसुरद्विषः।

पूतनासुपयःपानं शकटोच्चाटनं शिशोः॥ २८

tasya karmāṇyapārāṇi kīrtitānyasuradviṣaḥ|

pūtanāsupayaḥpānaṃ śakaṭoccāṭanaṃ śiśoḥ|| 28

अर्थ

शौनकादि ऋषियो! इसी यदुवंशमें जगत्पति भगवान् श्रीकृष्णने अवतार ग्रहण किया था। उन्होंने अनेक असुरोंका संहार किया। उनकी लीलाएँ इतनी हैं कि कोई पार नहीं पा सकता। फिर भी दशम स्कन्धमें उनका कुछ कीर्तन किया गया है। वसुदेवकी पत्‍नी देवकीके गर्भसे उनका जन्म हुआ। गोकुलमें नन्दबाबाके घर जाकर बढ़े। पूतनाके प्राणोंको दूधके साथ पी लिया। बचपनमें ही छकड़ेको उलट दिया॥ २७-२८॥

यह अर्थ श्लोक 27–28 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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