श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.13.6

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

चतुर्दश भविष्यं स्यात्तथा पंचशतानि च।

दशाष्टौ ब्रह्मवैवर्तं लिंगमेकादशैव तु॥ ६

caturdaśa bhaviṣyaṃ syāttathā paṃcaśatāni ca|

daśāṣṭau brahmavaivartaṃ liṃgamekādaśaiva tu|| 6

अर्थ

भविष्यपुराणकी श्‍लोक-संख्या चौदह हजार पाँच सौ है और ब्रह्मवैवर्तपुराणकी अठारह हजार तथा लिंगपुराणमें ग्यारह हजार श्‍लोक हैं॥ ६॥

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