॥ श्रीहरिः ॥
कौर्मं सप्तदशाख्यातं मात्स्यं तत्तु चतुर्दश।
एकोनविंशत्सौपर्णं ब्रह्माण्डं द्वादशैव तु॥ ८
kaurmaṃ saptadaśākhyātaṃ mātsyaṃ tattu caturdaśa|
ekonaviṃśatsauparṇaṃ brahmāṇḍaṃ dvādaśaiva tu|| 8
अर्थ
कूर्मपुराण सत्रह हजार श्लोकोंका और मत्स्यपुराण चौदह हजार श्लोकोंका है। गरुड़पुराणमें उन्नीस हजार श्लोक हैं और ब्रह्माण्डपुराणमें बारह हजार॥ ८॥
कौर्मं सप्तदशाख्यातं मात्स्यं तत्तु चतुर्दश।
एकोनविंशत्सौपर्णं ब्रह्माण्डं द्वादशैव तु॥ ८
कूर्मपुराण सत्रह हजार श्लोकोंका और मत्स्यपुराण चौदह हजार श्लोकोंका है। गरुड़पुराणमें उन्नीस हजार श्लोक हैं और ब्रह्माण्डपुराणमें बारह हजार॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.13.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 980) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/12/13/8/